भारत के पूर्वोत्तर में स्थित खूबसूरत और अपने चाय के बागानों के लिए प्रसिद्ध असम में लोगों में नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर बेहद गुस्सा भरा है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
यह वो क़ानून है जिससे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के गैर-मुस्लिम आबादी के लिए भारत की नागरिकता लेना आसान हो जाएगा.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
राज्य के कुछ ज़िलों में बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए हज़ारों की तादाद में सैनिकों को तैनात किया गया है. कर्फ़्यू लगाया गया है, इंटरनेट की सेवाएं निलंबित की गई हैं. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
लेकिन इस नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर सबसे पहले उबलने वाले असम में जो विरोध प्रदर्शन चल रहा है वो भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर ख़तरे के प्रति किसी चिंता की वजह से नहीं है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उनके लिए ‘बाहरी लोग’ के यहां आने से आबादी और सांस्कृतिक के स्वरूप के बिगड़ने का ख़तरा है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
तनाव का एक कारण यह है कि असम भारत का एक बहुत ही जटिल और बहु-जातीय राज्यों में से एक है. यहां असमिया और बांग्ला बोलने वाले हिंदुओं के साथ आदिवासियों का एक मिश्रित समूह रहता है. यहां की कुल 3.2 करोड़ आबादी का एक तिहाई हिस्सा मुसलमानों का है. आबादी के लिहाज से यह संख्या भारत प्रशासित कश्मीर के बाद सर्वाधिक है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
यह भारत के सबसे अधिक खंडित और अशांत राज्यों में से एक रहा हैः पूर्वोत्तर के चार राज्य असम से निकाल कर बनाए गए हैं और वर्तमान में असम में रह रहे आदिवासियों के तीन समूह अपना अलग राज्य चाहते हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
यहां के लोगों ने भाषाई पहचान और नागरिकता के मुद्दे पर संघर्ष किया है. असमिया और बांग्ला भाषी लोगों के बीच नौकरियों और संसाधनों को लेकर प्रतिद्वंद्विता रही है जो यहां सदियों से रह रही स्वदेशी जनजातियों के वैध दावों और आकांक्षाओं की अनदेखी किया करते हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसके अलावा बांग्लादेश से आए अवैध अप्रवासियों का मुद्दा भी है जो सदियों से एक गंभीर चिंता का विषय रहा है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बांग्लादेश के साथ असम लगभग 900 किलोमीटर की सीमा साझा करता है. इस सीमा को लांघ कर हिंदू और मुसलमान दोनों ही आए हैं. कुछ धार्मिक उत्पीड़न की वजह से तो अन्य नौकरियों की तलाश में. राज्य में अवैध विदेशियों की तादाद का अनुमान 40 लाख से एक करोड़ के बीच तक है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
1980 में छह सालों तक यहां इन विदेशियों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन चला. इस दौरान सैकड़ों लोगों की हत्याएं हुईं. इसके बाद 1985 में प्रदर्शनकारियों और केंद्र सरकार के बीच एक समझौता हुआ. यह सहमति बनी कि जो भी 24 मार्च 1971 के बाद उचित दस्तावेज़ के बिना असम में घुसा है उसे विदेशी घोषित करते हुए निर्वासित किया (वापस भेजा) जाएगा.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
हालांकि, जब अगले तीन दशकों तक कुछ भी नहीं बदला, तो भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि 1951 में बना ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़ंस’ (एनआरसी) यहां के वास्तविक नागरिकों की पहचान कर अपडेट किया जाए.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
अगस्त 2019 में अपडेटेड नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़ंस (एनआरसी), जैसा कि इसे कहा जाता है, प्रकाशित किया गया लेकिन इससे क़रीब 20 लोगों को बाहर रखा गया, यानी प्रभावी रूप से उनसे नागरिकता छीन ली गई.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
जब यह अपडेटेड रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़ंस (एनआरसी) तैयार किया जा रहा था तो केंद्र की सत्ता में आसीन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसका समर्थन किया था.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसके बाद उसे असम में हिंदुओं और आदिवासियों का बहुत बड़ा समर्थन मिला और वह 2016 में राज्य की सत्ता पर आसीन हो गई.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
लेकिन अंतिम रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़ंस (एनआरसी) जब प्रकाशित किया गया तो बीजेपी ने यह कहते हुए अपनी नीति बदल दी कि इसमें कुछ त्रुटियां रह गई हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसकी वजह यह थी कि बहुत से बंगाली हिंदू, जो पार्टी के लिए मजबूत वोट बैंक थे, उन्हें इस सूची में जगह नहीं मिली थी और उन पर अवैध अप्रवासी बनने का ख़तरा मंडरा रहा था.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
अब बीजेपी ने यह घोषणा की है कि एनआरसी की जो पहली लिस्ट प्रकाशित की गई है उसकी ग़लतियों को सुधारने के लिए एक और अपडेटेड लिस्ट बनाई जाएगी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
एनआरसी और नागरिकता क़ानून दोनों से ही अब पुराने फॉल्ट लाइन खुलने की आशंका है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
यहां असमिया भाषा बोलने वाली लगभग आधी आबादी को लगता है कि अवैध प्रवासियों का पता लगाने और उन्हें वापस भेजने का वादा करने वाली बीजेपी ने उन्हें धोखा दिया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
मुसलमानों में गुस्सा है कि नागरिकता क़ानून भेदभावपूर्ण है और अंत में केवल उनके धर्म के लोगों को अवैध प्रवासियों के तौर पर चुना जाएगा.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बंगाली भाषी हिंदू भी परेशान है क्योंकि मुसलमानों की जगह उनके (बंगाली भाषी) लोग एनआरसी से बाहर हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
चिंताएं और भी हैं. इस क़ानून के तहत असम के कुछ क्षेत्रों को विशेष सुरक्षा प्रदान है. ये इलाके आदिवासी बहुत हैं और यहां किसी भी समुदाय के अवैध अप्रावासियों के बसने पर रोक है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
लेकिन कईयों का कहना है कि चूंकि यह पूरे इलाके को कवर नहीं करता है, लिहाजा यहां के लोग असम के अन्य हिस्सों में भी जा सकते हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
2016 में अघोषित संपत्ति को बाहर निकालने के लिए की गई नोटबंदी का हवाला देते हुए पूर्वोत्तर के मामलों के जानकार सुबीर भौमिक कहते हैं, “मुझे नहीं लगता कि बीजेपी को असम में नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी को लेकर ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद रही होगी. यहां हो रहा विरोध प्रदर्शन उनके लिए बहुत बड़ी मुसीबत ला सकता है.”मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
वे कहते हैं, “ऐसा लगता है कि बीजेपी को इस तूफ़ान की आशंका नहीं थी.”मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
भौमिक कहते हैं कि इससे हुए नुकसान को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ट्वीट किया कि ‘उनकी सरकार असमिया लोगों के राजनीतिक, भाषाई, सांस्कृतिक और ज़मीन के अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक रूप से प्रतिबद्ध है. कोई भी आपके अधिकारों, विशिष्ट पहचान और खूबसूरत संस्कृति को आपसे छीन नहीं सकता.’मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
लेकिन प्रधानमंत्री का यह ट्वीट असम के प्रदर्शनकारियों को शांत करने में कितना कारगर होगा, यह तो समय ही बताएगा.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह